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सरकार के झूठे वादों से निराश काम की तलाश में फिर लौटने लगे मजदूर

पटना 18 जून , 2020

बिहार सरकार के मुताबिक राज्य के बाहर से करीब 28 लाख मजदूर वापिस आये हैं (प्रवासी मजदूर के मामले में सुप्रीम कोर्ट में चल रहे केस में बिहार के वकील ने यह आंकड़ा दिया था)| तमाम लोग बहुत कष्ट झेल कर किसी तरह घर पहुंचे ही थे कि रोज़गार के आभाव में इसमें से बहुत सारे मजदूरों को मजबूरन काम की तलाश में लौटना पड़ रहा है | हर एक जिला में दूसरे राज्य ले जाने के लिए बसों के आने का सिलसिला ज़ोरों पर है | एन एच पर बसें लगीं हुई दिख रही हैं |

3 जून को मुख्य नितीश कुमार ने पोस्टर जारी कर मजदूरों को सन्देश दिया था कि वह चाहते हैं कि मजदूरों को मजबूरी में बाहर नहीं जाना पड़े और उनको यहीं रोज़गार मिले | क्या वह जनता को बताएँगे  कि अभी तक उन्होंने कितने प्रवासी मजदूर को काम मुहैया कराया है ? सच्चाई यह है कि बिहार के लोग अभी भयानक बेरोज़गारी का सामना कर रहे हैं | देश की जानी मानी संस्था सेंटर फॉर मोनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी (सी.एम.आई.ई) के मुताबिक अप्रैल महीने में बिहार में सबसे अधिक 49.5 प्रतिशत की बेरोज़गारी दर थी और मई महीने में 46.2 प्रतिशत | ऐसे में मुख्यमंत्री के सारे दावे खोखले साबित हो रहे हैं |

पिछले 15 सालों में सुशासन का दावा करने वाली एनडी सरकार रोज़गार सृजन करने के मामले में फेल साबित हुई है | सरकार के पास एकमात्र मनरेगा है जिससे वह कुछ काम लोगों को दे सकती है पर वहां भी काम बड़े पैमाने पर नहीं खुल पा रहा है | मई 2020 में पूरे बिहार में सिर्फ 16 लाख परिवार ने काम किया है | जबकि मनरेगा में बिहार में 1.8 करोड़ से अधिक परिवार का जॉब कार्ड बना हुआ है | यह दर्शाता है कि मनरेगा में बिहार में सिर्फ 9 प्रतिशत जॉब कार्ड धारकों को ही काम मिल पाया है |        

रोज़गार की यह स्थिति भयावह है | ऐसे में जन आंदोलनों का राष्ट्रीय समन्वय मांग करता है कि:-

  • सरकार जनता को बताये कि इन 28 लाख मजदूरों के लिए  सरकार ने रोज़गार के कौन से अवसर उपलब्ध कराया है | इससे सम्बंधित आंकड़ा वह जारी करे |
  • बड़े पैमाने पर काम खोल कर मनरेगा में सिर्फ 100 दिन नहीं बल्कि 200 दिनों का काम उपलब्ध कराए
  • बिहार के बंद पड़े तमाम चीनी मिल खोले जाएँ |
  • कृषि आधारित रोज़गार सृजित करने के किये सरकार निवेश करे |
  • मकई की खरीद न्यूनतम समर्थन मूल्य पर सरकार द्वारा हो |
  • उत्तरी बिहार के इलाके में पटुआ का कारखाना खोला जाये |
  • किसानों को प्रति एकड़ 10000 रु का अनुदान दिया जाये |

सधन्यवाद

जन आन्दोलनों का राष्ट्रीय समन्वय की ओर से :-  शहीद कमाल, कामयानी स्वामी,  आशीष रंजन , महेंद्र यादव, काशिफ युनुस, उदय कुमार

Written by Bihar Coverez

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